लखनऊ अग्निकांड की दर्दनाक तस्वीर: राख में तब्दील हुई बस्ती, टूटे सपनों के बीच लोग ढूंढते रहे अपनी दुनिया के निशान

लखनऊ: टेढ़ी पुलिया इलाके में सीतापुर बाईपास किनारे बसी जिंदगी एक ही रात में राख में बदल गई। बुधवार तक जहां सैकड़ों परिवारों की चहल-पहल थी, वहीं गुरुवार को वही जगह उजाड़ मैदान में तब्दील नजर आई। चारों ओर सिर्फ जली हुई झोपड़ियों के ढांचे, राख में बदले सामान और बिखरे मलबे के बीच लोग अपनी खोई हुई दुनिया तलाशते दिखे।

घटनास्थल पर जले हुए कपड़े, अनाज, बर्तन, लोहे के बक्से, टीवी, फ्रिज और कूलर के अवशेष बिखरे पड़े थे। गुरुवार को लोग इस उम्मीद में लौटे कि शायद आग से कुछ बच गया हो, लेकिन ज्यादातर को निराशा ही हाथ लगी। वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी राख में तब्दील हो चुकी थी।

राख में ढूंढते बचपन, बुझ गई बच्चों की मुस्कान

अग्निकांड ने सबसे ज्यादा असर बच्चों पर डाला है। उनके बस्ते, किताबें, यूनिफॉर्म और सपने सब जल गए। 14 साल का आलोक और 10 साल की नैंसी अपने माता-पिता के साथ राख में अपने स्कूल बैग और किताबें खोजते नजर आए।

नैंसी अधजले पन्नों को हाथ में लिए रोते हुए कहती है कि उसके पिता ने 12 हजार रुपये खर्च कर किताबें और यूनिफॉर्म खरीदी थीं, जो अब पूरी तरह जल चुकी हैं। बस्ती के अधिकांश बच्चे आसपास के निजी स्कूलों में पढ़ते हैं, जबकि कुछ बच्चे सरकारी स्कूलों में जाते हैं। स्थानीय लोग अब प्रशासन और समाजसेवी संस्थाओं से बच्चों की पढ़ाई में मदद की अपील कर रहे हैं।

शादी का घर भी नहीं बचा, बारात पहुंची तो उजड़ चुकी थी दुनिया

इस त्रासदी के बीच एक परिवार की खुशियां भी मातम में बदल गईं। बस्ती में रहने वाले मनीष की शादी थी, लेकिन आग ने उनके घर को पूरी तरह तबाह कर दिया। हालात ऐसे थे कि बारात में सिर्फ करीब 10 लोग ही शामिल हो सके।

मनीष के भाई ने बताया कि लड़की पक्ष ने 100 से ज्यादा बारातियों के स्वागत की तैयारी की थी, लेकिन आग ने सब कुछ खत्म कर दिया। शादी के बाद दुल्हन को लेकर परिवार को रिश्तेदार के घर शरण लेनी पड़ी।

कमेटी की जमा पूंजी भी आग में खाक

हादसे में कई परिवारों की सालों की जमा पूंजी भी जलकर राख हो गई। नजमा नाम की महिला हाथों में जले हुए नोट लिए खड़ी थीं। उन्होंने बताया कि उन्होंने कमेटी चलाकर बड़ी मुश्किल से करीब डेढ़ लाख रुपये जोड़े थे, जो पूरी तरह जल गए।

उन्होंने बताया कि उनके पति के ई-रिक्शा का चार्जर खराब हो गया था, जिसे ठीक कराने के लिए वह पैसे घर लाई थीं, लेकिन इससे पहले ही आग ने सब कुछ खत्म कर दिया।

बेटी की शादी के लिए जोड़े पैसे भी जल गए

रेशमा के पिता मेराज अपनी बेटी की शादी की तैयारी में जुटे थे। उन्होंने एक-एक कर करीब तीन लाख रुपये जमा किए थे, जो बक्से में रखे थे। आग बुझने के बाद जब वह लौटे तो उन्हें जला हुआ बक्सा मिला, जिसमें रखी पूरी रकम खाक हो चुकी थी।

हादसे में गई कई जिंदगियां

इस भीषण अग्निकांड में पांच से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। हादसे ने न सिर्फ घर और सामान छीना, बल्कि कई परिवारों के अपने भी छीन लिए। अब मलबे के बीच खड़े लोग सिर्फ यही उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें फिर से जिंदगी शुरू करने का कोई सहारा मिल सके।

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